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Saturday, 8 September 2012

एक   ख़्वाब मेरा बादल
 सा उस पार चला गया
था तो भीगा सा...
पर  कुछ इन आँखों सा 
बिन बरसा ही रह गया..

Friday, 7 September 2012


जानेतुझे चाहने की सज़ा
और कितनी लिखी है
क्यूँ तेरा नाम मिटता नही इस दिल से..
क्यूँ मेरे आँसुओं से नही धुलता ये
क्यूँ मुझे ये अहसास दिलाने के लिए
हर बार और ज़्यादा
 गहरा और चमकदार हो जाता है,
 कि मैं कितनी मजबूर हूँ..
नहीं हूँ मजबूत तुम्हारी तरह
क्योंकि मैने ये संघर्ष दिल से किया है
नही किया अपने दिमाग़ को शामिल
नहीं स्वीकार कर पाई तुम्हें दिल से
पर फिर भी तुमसे प्यार किया है
काश तुम होते
एक रोशनी के बिंदु मात्र
जिसे सिर्फ़ अहसासों मे जी लेती
सिर्फ़ निर्विकार अहसास....