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Wednesday, 8 October 2014

वो चाँद चाँद एक खवाब ख्वाब सा,
मैं लहर लहर एक रात  सी,
वो सहर सहर एक आसमान सा,
मै पहर पहर एक  बात सी,
वो  महका महका एक कवल सा,
मैं खिली खिली उन्मुक्त हँसी सी
वो भूला भूला  एक झूठ सा,
मैं बिखरी बिखरी एक याद सी.,
वो सख़्त सख़्त एक दरख़्त सा,
मैं झुकी झुकी एक नरम डाल सी,
वो हल्का हल्का आवारा बादल सा,
मैं भीगी भीगी फुहार सी
वोगहरा गहरा नीला सागर सा
मैं खोई खोई इंतज़ार सी. 

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