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Tuesday, 5 July 2011

parchai


By Nidhi Sahu· Sunday, April 10, 2011

तू मेरे दिल में अहसास है समंदर सा,
मैं एक बरसाती नदी सी , मचल कर उतर गयी.
तू दूर बहुत, विस्तृत क्षितिज सा,
में एक छिटकी किरण सी, ज़मीं पर बिखर गयी.
तू ठहरा हे दिल की दहलीज़ पर तूफ़ान सा,
मैं एक बदली बिन बरसे ही बह गयी.
तू धूप का एक टुकड़ा लगे क्यूँ छाँव सा,
मैं खुद से टूटी  हुई, तुझ में सिमट गयी.

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