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Wednesday, 8 October 2014

वो चाँद चाँद एक खवाब ख्वाब सा,
मैं लहर लहर एक रात  सी,
वो सहर सहर एक आसमान सा,
मै पहर पहर एक  बात सी,
वो  महका महका एक कवल सा,
मैं खिली खिली उन्मुक्त हँसी सी
वो भूला भूला  एक झूठ सा,
मैं बिखरी बिखरी एक याद सी.,
वो सख़्त सख़्त एक दरख़्त सा,
मैं झुकी झुकी एक नरम डाल सी,
वो हल्का हल्का आवारा बादल सा,
मैं भीगी भीगी फुहार सी
वोगहरा गहरा नीला सागर सा
मैं खोई खोई इंतज़ार सी. 

Wednesday, 10 September 2014

love unconditional

is this a prayer of some one
or sobbing sigh of hurtful heart
in the universe?
all my efforts go in vain
my love could not win your ego
do not doubt you..
 but can't see
loosing my identity...
feeling low, in secured,
scared n helpless..
still hope for d day
you to come
out of your
manifested box
accept me unconditionally
not granting  me any wish
to show your strength but
a single true moment ...
true self of you holding
my  love in your arms

saudagar

दोनो ही पागल है,
मैं उदासियों को मिट्टी मे दबा देती हूँ,
वो अक्सर उनसे एक खवाब उगाने की कोशिश करता है..
मैं जब भी किनारा बन गयी..
वो लहर बन जाता है.
वो खवाब का सौदागर है.
अक्सर कुछ अजीब से ही सौदे करता है..
उसे याद दिलाती हूँ,
की तुम बादल हो,
कभी आसमान नही हो सकते हो,
और मैं धानी रंग धरती का,
ना मैं नीली हो सकती हूँ
ना तुम धानी..
कही नही..
बस फिर यू ही
बाते क्यूँ..?

Thursday, 4 September 2014

देख कर अनदेखा किया करता है,
 वो साया जो अपने
कद से भी बहुत उँचा है
अक्सर उस राह पर नज़र आता है,
ख़यालों से बात करता हुआ,
कुछ शब्द ढूंढता हुआ,
रात के अंधेरे मे..
और फिर देखती हू उसे
 सुबह स्वप्न बेचते हुए

Wednesday, 14 May 2014

मुझे तुम्हारा तुमसा और
 मेरा मुझसा होना अच्छा लगता था..
शब्द नही थे, अर्थ कई थे, फिर भी,
मुझे तुमसे सुनना, फिर
 अपनी कहना अच्छा लगता था,
फूल ,चाँद और सितारो से परे..
तुम्हारा मुस्कुराना 
और मेरा हँसना अच्छा लगता था..
कोई राह नही थी,
कोई मंज़िल नही थी,
पर मेरा तुझ तक 
और तेरा मुझ तक 
चल कर आना अच्छा लगता था..
जो लौट चले हो घर को अपने,
तो सोचा, कह दू..
थोड़ा-थोड़ा सा ही सही,
पर पूरा हो जाना अच्छा लगता था