Labels

Saturday, 8 September 2012

एक   ख़्वाब मेरा बादल
 सा उस पार चला गया
था तो भीगा सा...
पर  कुछ इन आँखों सा 
बिन बरसा ही रह गया..

Friday, 7 September 2012


जानेतुझे चाहने की सज़ा
और कितनी लिखी है
क्यूँ तेरा नाम मिटता नही इस दिल से..
क्यूँ मेरे आँसुओं से नही धुलता ये
क्यूँ मुझे ये अहसास दिलाने के लिए
हर बार और ज़्यादा
 गहरा और चमकदार हो जाता है,
 कि मैं कितनी मजबूर हूँ..
नहीं हूँ मजबूत तुम्हारी तरह
क्योंकि मैने ये संघर्ष दिल से किया है
नही किया अपने दिमाग़ को शामिल
नहीं स्वीकार कर पाई तुम्हें दिल से
पर फिर भी तुमसे प्यार किया है
काश तुम होते
एक रोशनी के बिंदु मात्र
जिसे सिर्फ़ अहसासों मे जी लेती
सिर्फ़ निर्विकार अहसास....

Thursday, 5 July 2012


दिल और दिमाग़ की जंग तो सदा लड़ते ही आए हे
अजब हालात हे जिंदगी के,













अब तो दिल भी एक सवालात पर,
दो टुकड़े हो गया है

Saturday, 14 April 2012


यकीन हो चला हे मुझे
इक मोड़ पर मिलकर
 जुदा हो गये रास्ते हे हम*
ज़मीन पर आसानी से
दूरियाँ तय करने वाले
क्यों दिलों की दूरियों
को कम नहीं करते.?
कोई भी खवाब आँखों मे नहीं डूबता
बस सुबह हो जाती हे...
दो अलग प्रजाति
के पौधों की ग्रॅफटिंग कर के
ईश्वर स्वयम् परिणाम के लिए उत्सुक हे..
कितना आसान हे..
बारिश मे  मन को भिगोना
कठिन हे गीली आँखों के कोरो को छूना
दो   किनारे करते हे कोशिश
समेटने की नदी के प्रबल प्रवाह को
खामोशी से.........

Friday, 6 April 2012


न तुझे पाने की ख़्वाहिश रही,
 ना तुझे खोने का मलाल
तेरे इस खेल से बिखरे
कुछ ऐसे  हालात....
हसरतें गर मेरी हे,
तो कुछ चाहत तेरी भी थी
तेरे अहसानों के मोहताज़ नहीं ..
ये मेरे ज़ज्बात.....
कब तक  इक अहसास को
संभाले रहेंगे हम..?
जीना चाहते हे खुद को
अब मेरे ख्यालात....

Thursday, 5 April 2012

tarpan


जाओ मुक्त किया मैने तुम्हें,
अपने प्रेम से, ख्यालों से,
वादा तो नही करती,
पर कोशिश करूँगी
पूरी ईमानदारी से..
तुम्हें ना सोचने की..
चाहने की....
काश कोई ऐसी जगह होती
जहाँ कर आती मैं अपने
प्रेम का तर्पण..
मुक्त कर देती
तुम को, स्वयं को

Thursday, 15 March 2012


कभी बनाई थी, 
अपनी उंगलियों से तुम्हारे सीने पर 
एक जगह छोटी सी,
सिर्फ़ मेरी...
वही से एक रास्ता बना कर 
जाना चाहती हूँ..
गहरे अंधेरे रस्तो से होते हुए
ज्वालामुखी के भी नीचे..
राख के ढेर पर, 
गहरी साँस लेकर
बंद आँखो से, 
तुम्हे धीरे से छूना चाहती हूँ
तुम्हें जानना चाहती हूँ

Saturday, 14 January 2012



आज भी तू हवाओं में हे,
फिजाओं में हे, धड़कन में हे,
दुआओं में हे, नींदों में हे,
 चाहतों में हे,मौसम में हे,
 गीतों में हे,हँसी में हे, आँसू में हे
हर पल में हे, हर शह में हे..
पर ये दिल ,
अब और काफ़िर बनने से इन्कार करता हे